कभी कभी जिंदगी ऐसी कहानियाँ किस्से हो जाते हैं कि बाद में सोच कर हँसी आती है। आज मुझे ऐसा ही एक किस्सा याद आ रहा है।
हुआ यूं कि मैंने मई 2022 मे देहरादून में एक संस्थान जॉइन किया जिसमें लगातार प्रशिक्षण आयोजित करने थे। मुझे याद है लगभग 15 प्रशिक्षण लाइन मे थे। नया संस्थान था। बहुत सी चीजें पता नही थी। नए लोग थे। और काम बहुत ढेर सारा. प्रशिक्षण से पूर्व प्रशिक्षण के दौरान और प्रशिक्षण के बाद के कार्यों को अंजाम देने मे लगभग 8 से 10 महीने लग गए। क्लासेस भी लेनी थी coordinate भी करना था और रिपोर्ट राइटिंग भी। और उस टाइम मेरा काम के प्रति जनून ऐसा था कि मैं अपने घर अपनी निजी जिंदगी को लगभग भूल जाती थी। मै 10 महीने तक घर नही आ पाई। प्रशिक्षण पूरे होने के बाद कुछ दिन की छुट्टी लेकर घर के लिए reservation लिया और अगली सुबह अपने शहर हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पहुँची। बाहर आकर एक टेम्पू बुक करवाने उसके पास गई अरे ये क्या……. मैं अपने घर का एड्रेस भूल गई। बड़ी देर में याद आया घर तो कुसुमखेड़ा में है। टेम्पू वाले को पूछा भईया कुसुमखेड़ा चलोगे। अब कुसुमखेड़ा तो बहुत बड़ा है। वो बोला कुसुमखेड़ा कहाँ पर। हे भगवान् क्या है वो जगह? मेरा घर कौन से एरिया मै है याद ही नही आया। अपनी झेंप मिटाने को मैंने बोला भईया आप चलो मै बता दूँगी कहा जाना है। मैं टेम्पू में बैठ गई और एड्रेस याद करने की कोशिश करने लगी । अगर घर मे फोन कर पूछती तो वो मेरी मजाक बनाते इसलिए खुद से याद करने की कोशिश करने लगी।
थोड़ी दूर चलने के बाद बस स्टेशन आया, मुखानी आया फिर पीलीकोठि और फिर अबदूल्ला पेट्रोल पंप। मुझे जगह देखकर याद आती रही जहाँ से गुजर रहे थे। फिर दिखा आर के टेंट रोड का बोर्ड। बोर्ड देखते ही याद आ गई घर की गली। मैंने बोला भईया यही जाना है उसने आश्चर्य से मुझे देखा फिर बोला पहले ही बता देते मैडम आर के टेंट रोड जाना है तो मै और शॉर्ट रास्ते से ले आता। मुझे लगा कुसुमखेड़ा चौराहे के पास कही जाना होगा। आप पहले भी आये होगे ना यहाँ। अब उसे क्या ही बताती अपने ही घर जा रही हूँ। हा हा हा.
घर पहुँच कर सबको बताया सब खूब हँसे।
